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रसूखदारों पर मेहरबान पुलिस? जैविक कॉटन मामले में मंत्री सारंग बोले किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा!

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खरगोन। जिले की भीकनगांव विधानसभा के झिरन्या विकासखंड के किसानों के नाम पर फर्जी जैविक खेती बताने वाले जैविक माफियाओं पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एफआईआर दर्ज तो हुई लेकिन भीकनगांव-झिरन्या पुलिस रसूखदारों को बचाने में लगी है। जब ये बात शनिवार को खरगोन कलेक्टोरेट पहुंचे जिले के प्रभारी और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के सामने आई तो मंत्री सारंग ने पत्रकारवार्ता में स्पष्ट कहा किसानों के साथ धोखा करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। जैविक कॉटन घोटाले के मामले में रसूखदारों के नाम आने के चलते भीकनगांव पुलिस द्वारा एफआईआर की कॉपी ऑनलाइन नहीं डाली गई है, इस पर मंत्री महोदय, निरुत्तर हो गए। 

खरगोन जिला मुख्यालय पर प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग मध्य प्रदेश सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकारवार्ता लेने डीएम दफ्तर पहुंचे थे। पत्रकार वार्ता के दौरान पत्रकारों ने भीकनगांव विधानसभा क्षेत्र के झिरन्या विकासखंड के धुपीखुर्द और आसपास के कई गांवों के किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े को लेकर हाई कोर्ट के निर्देश पर चैनपुर थाने पर तीन आरोपियों एफआईआर दर्ज की लेकिन गिफ्तारी नहीं हुई। इस पर मंत्री सारंग ने कहा किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। किसानों के साथ धोखा नहीं होने देंगे। 

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद हुई एफआईआर-

झिरन्या विकासखंड के धूपी और आसपास के गांव के किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में मां गंगा कॉटन को लेकर किसानों ने रैली निकाल कर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन दिया था लेकिन ना तो जिला प्रशासन ने इस मामले में कोई कार्रवाई की और ना ही पुलिस प्रशासन ने। निराश किसानों को न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाई कोर्ट के आदेश के बाद 16 अक्टूबर 25 को बड़ी मुश्किल से पुलिस ने तीन लोगों अरुण पाटीदार माँगरुल रोड़ खरगोन, सिद्धार्थ अरोले ब्यूरो वैरिटोस मुम्बई और दिलीप सिंह चैनपुर खरगोन के खिलाफ केस दर्ज किया।

रसूखदारों को बचा रही पुलिस-

मध्य प्रदेश शासन ने पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एफआईआर को ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद 16 अक्टूबर 2025 को भीकनगांव थाने पर जैविक कॉटन फर्जीवाड़े को लेकर एफआईआर तो दर्ज की गई लेकिन ना तो इसे ऑनलाइन अपलोड किया गया और ना ही मीडिया को भनक लगने दी। पीड़ित किसानों ने बताया भीकनगांव एसडीओपी राकेश आर्य और चैनपुर पुलिस रसूखदारों को बचा रही है। अब भी मुख्य आरोपी सहित कर्ताधर्ता आराम से घूम रहे हैं। हाई कोर्ट के आदेश का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं की जा रही है, इससे पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। 

ये कहा था किसानों ने- 

जिले के झिरन्या क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) के नाम पर हुए कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ एडिशनल एसपी और एसडीएम को आवेदन सौंपा था। किसानों ने आरोप लगाया था कि उनकी सहमति के बिना उनके आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज़ और हस्ताक्षर/अंगूठे का उपयोग कर फर्जी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट, बिल और भुगतान रसीदें तैयार की गईं। आवेदन में कहा कि इस पूरे घोटाले में किसानों को झूठे तौर पर जैविक उत्पादक दिखाया गया, जबकि वे वास्तव में रासायनिक खाद और कीटनाशक का उपयोग करते थे। इन फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करोड़ों रुपये के अवैध व्यापार का खेल चलाया गया है।

किसानों के दस्तावेज़ों से बने फर्जी आईसीएस समूह-

किसानों के अनुसार, उनकी जानकारी के बिना निम्नलिखित फर्जी “ICS (Internal Control System)” समूह बनाए गए। ग्रीन वर्ल्ड, रुद्र इको, शिव इको और स्टार लाइफ। प्रत्येक समूह में 450 से 500 किसानों के नाम जोड़े गए हैं, जबकि अधिकांश किसानों को इसकी भनक तक नहीं है। इन सभी समूहों को Bureau Veritas, Mumbai नामक प्रमाणन संस्था द्वारा बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के जैविक प्रमाण पत्र जारी किए गए। किसानों का कहना है कि ये केवल कागज़ी प्रमाणन है, जिसमें जमीनी स्तर पर कोई जांच नहीं हुई।

किसानों ने कहा ये हैं कर्ताधर्ता-

शिकायत ने हाई कोर्ट में किसानों द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों ने कहा अर्पित बनकर, संचालक माँ गंगा कॉटन निवासी गंगानगर एवं ग्रीन गोल्ड कॉलोनी खरगोन, राज रूपेश पंडित, पार्टनर माँ गंगा कॉटन, निवासी मंडलेश्वर, कल्याणी महाजन, पार्टनर माँ गंगा कॉटन, निवासी राजपुर (जिला बड़वानी), अरुण पाटीदार ICS मैनेजर, जो किसानों के दस्तावेज़ एकत्रित करने और समूह बनाने में शामिल बताया गया है। Bureau Veritas, Mumbai के ऑडिटर और प्रमाणन अधिकारी, जिन्होंने बिना स्थल निरीक्षण के प्रमाण पत्र जारी किए। किसानों ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने खरगोन के “91 राधा वल्लभ मार्केट” पते को कागज़ी दफ्तर के रूप में दर्शाया है, जबकि वहां कोई वास्तविक कार्यालय मौजूद नहीं है।

ये कहा माननीय न्यायालय ने-

इस मामले पर माननीय हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने 31 जुलाई 2025 को Writ Petition No. 30220/2025 में आदेश जारी किया था कि जांच पूरी कर 60 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाए लेकिन किसानों का कहना है कि 16 अक्टूबर 2025 तक FIR दर्ज हुई है। 

इन गांवों में हुआ फर्जीवाड़ा

आवेदन के अनुसार, फर्जी जैविक खेती का ये जाल घोड़ी बुजुर्ग, सपाटिया, गुलझिरा, धूपा, पीढ़ीजमाली, रॉयलबैड़ा, गाड़ग्याम, रुदा बूंदा, मांडवा और तितरानिया सहित आसपास के कई ग्राम पंचायतों तक फैला हुआ है। ये क्षेत्र मुख्यतः आदिवासी बहुल है, जहां किसानों की अशिक्षा और सरकारी तंत्र की कमी का फायदा उठाकर यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है।

यक्ष प्रश्न

जैविक कॉटन फर्जीवाड़े में खरगोन कुख्यात हो गया है हालांकि खरगोन के साथ पूरा प्रदेश कागजी जैविक कॉटन को लेकर दिल्ली एपीडा तक बदनाम है। मामले की गूंज दिल्ली तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद भी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का इस तरह हाथ पैर हाथ धरे बैठे रहना संदिग्ध प्रतीत होता है। क्या प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग के निर्देश के बाद पुलिस प्रशासन का शिकंजा मुख्य रसूखदार आरोपियों सहित ऑर्गेनिक कॉटन माफिया का गिरेबां कसेगा या फिर मंत्री महोदय का निर्देश ढांक के तीन पात साबित होगा?

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