खरगोन। नगरपालिका खरगोन की अपील समिति की सभापति तृप्ति राजेश रावत और सदस्य वल्लभदास महाजन ने कलेक्टर भव्या मित्तल को अचानक इस्तीफा सौंप दिया? जैसे ही ये मामला सोशल मीडिया पर आया राजनीतिक हड़कंप मच गया। दुर्भाग्य से सभापति और सदस्य ने अपने पद से इस्तीफा सिर्फ इसलिए दे दिया क्योंकि तीन साल में एक भी प्रकरण उनके समक्ष नहीं आया या यह कहें भेजा ही नहीं गया। अपील समिति का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि परिषद क्षेत्र में किसी समस्या के निराकरण न होने पर ये मामला अपील समिति के समक्ष जाता है।
नगरपालिका परिषद खरगोन की अपील समिति के सभापति तृप्ति राजेश रावत और सदस्य वल्लभ महाजन ने अपने पदों से इस्तीफा एक दिन पहले यानी 8 दिसंबर को कलेक्टर भव्या मित्तल को सौंप दिया। यह पत्र मंगलवार की शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अपील समिति सभापति तृप्ति रावत ने जो कि वार्ड क्रमांक 8 की पार्षद भी हैं अपने इस्तीफे में लिखा कि “मुझे पार्षद निर्वाचित होने के बाद नगरपालिका परिषद में अपील समिति के सभापति/अध्यक्ष पद का निर्वाचन होने पर सभापति निर्वाचित किया गया था। पिछले तीन वर्षों में अपील समिति के समक्ष एक भी विषय नहीं आया, इस स्थिति में मुझे अपील समिति के सभापति पद पर बने रहने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है। अतः मैं नगरपालिका परिषद की अपील समिति के सभापति के पद से त्यागपत्र दे रही हूं, मेरे साथ ही समिति के सदस्य वल्लभदास महाजन पार्षद वार्ड क्रमांक 13 के द्वारा भी समिति सदस्य के पद से इस्तीफा दिया जा रहा है जो इस पत्र के साथ संलग्न है। अनुरोध है की अपील समिति के सभापति से मेरा और अपील समिति के सदस्य वल्लभ दास महाजन का त्यागपत्र स्वीकार करने के कृपा करें।
क्या होता है अपील समिति का कार्य और महत्व-
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि नगर पालिका या नगर परिषद में अपील समिति का काम क्या होता है। नगर पालिका/नगर निगम की अपील समिति के सभापति का मुख्य कार्य नगर निकाय में होने वाले विवादों, दंड, कर (Tax) संबंधित अपीलों और प्रशासनिक निर्णयों पर पुनर्विचार करना और अंतिम निर्णय देना होता है। सरल भाषा में कहें, जनता या व्यापारी अगर किसी फैसले से असंतुष्ट हों तो उनकी अपील सुनकर निर्णय देना।
ये है सभापति और सदस्य के कार्य-
सभापति अपीलों की सुनवाई करते हैं। संपत्ति कर, जल कर, लाइसेंस शुल्क, जुर्माने आदि पर यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति हो, तो वे अपील समिति के सामने अपील करता है। सभापति उस अपील की सुनवाई करते हैं। साथ कर निर्धारण, नोटिस, दंड, लाइसेंस रद्द, भवन अनुमति अस्वीकृत आदि के दस्तावेजों की जांच करवाना। अपीलकर्ता (Applicant) और नगर पालिका/नगर निगम के अधिकारी, दोनों की बात सुनकर निष्पक्ष निर्णय के लिए मार्गदर्शन देना। समिति की बैठक बुलाना और निर्णय पारित करना। यदि नगर निकाय ने गलत कर वसूला हो या गलत दंड लगाया हो, तो उसे संशोधित या निरस्त करने का अधिकार भी सभापति को होता है।
नहीं भेजा एक भी प्रकरण-सभापति
अपील समिति सभापति और वार्ड क्रमांक 8 की पार्षद तृप्ति राजेश रावत का कहना है वास्तव में मेरे निर्वाचन 3 साल पहले अपील समिति के सभापति के रूप में हुआ था। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए एक भी विषय नगरपालिका खरगोन द्वारा 3 साल में नहीं भेजा गया इसलिए इस पद पर रहने का कोई औचित्य नहीं बनता था इसलिए इस्तीफा दे दिया है।
तीन साल में एक भी विषय नहीं लाएं-अध्यक्ष
मामले में खरगोन नगरपालिका अध्यक्ष छाया जोशी का कहना है मुझे इस तरह का कोई भी इस्तीफा नहीं मिला है, हो सकता है कलेक्टर साहब को इस्तीफे दिए गए हों। तीन साल में एक भी विषय लाया नहीं गया, वे विषय लाते तो उस पर विचार किया जाता।
बंदरबांट चल रही इसलिए नहीं गया एक भी मामला-नेता प्रतिपक्ष
मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष रियाज शेख का कहना है नगरपालिका की परिषद में मामले आते हैं लेकिन बंदरबांट चल रही है। भारी गड़बड़ी की जा रही है इसलिए कोई भी मामला अपील समिति के समक्ष नहीं भेजा गया, जिन मामलों में विवाद होता है ऐसे मामलों को अपील समिति के समक्ष भेजा जाना चाहिए लेकिन भारी भ्रष्टाचार के कारण दुर्भाग्य से तीन साल में एक भी मामला अपील समिति के समक्ष नहीं भेजा गया।
