Sat. Mar 7th, 2026

डीएम दफ्तर के लिए छात्राओं की दौड़, जिम्मेदार मौन? 

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खरगोन। जिले के होस्टल्स पर आखिर कैसा ग्रहण लगा। चार दिन पहले कन्या छात्रावास आभापुरी की छात्राएं डीएम से मिलने के लिए पैदल निकल गई थी और अब केवल पांचवें दिन आभापुरी कस्तूरबा कन्या छात्रावास की छात्राएं दौड़ लगाते हुए डीएम दफ्तर के लिए निकल पड़ी। क्या बेटियां इतनी समझदार हो गई है या फिर पूर्व अधीक्षक और बाहरी लोग बच्चों के नाजुक कंधों पर बंदूक रखकर फायर कर रहे हैं। कुछ भी हो आखिर बीईओ, बीआरसी, जनशिक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी डीसीपी, जिला पंचायत सीईओ, जनपद पंचायत सीईओ जैसे अधिकारी क्या जिम्मेदारी निभा रहे हैं?

खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर झिरन्या विकासखंड की कस्तूरबा कन्या छात्रावास आभापुरी की मासूम बालिकाएं अपने हॉस्टल से दौड़ लगाते हुए खरगोन डीएम दफ्तर से मिलने के लिए सुबह-सुबह रवाना हो गई। नारे लगाते हुए बारिश के मौसम में कच्चे मार्ग से बगैर किसी सुरक्षा के सैकड़ो बच्चियों के इस तरह सड़क पर दौड़ते हुए खरगोन के लिए निकालना बेहद जोखिमभरा है। आखिर बच्चियों हॉस्टल में इतनी ट्रस्ट क्यों हो रही है, कि उन्हें अपने ही हॉस्टल अधीक्षक के खिलाफ इस तरह हॉस्टल छोड़कर रोड पर दौड़ लगाना पड़ रही है। आखिर इन बच्चियों को डीएम से ही क्यों मिलना है? क्या विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जनपद पंचायत के सीईओ, बीआरसी, संकुल के जवाबदारी और जन शिक्षक उनकी बात नहीं सुन रहे हैं या फिर इन सब बातों के पीछे पूर्व हॉस्टल अधीक्षक बाहर बैठकर राजनीतिक खेल रहे हैं। मार्च 5 दिन में इस तरह दो हॉस्टल्स की एक विकासखंड की दो हॉस्टल्स के सैकड़ो छात्राओं का इस तरह हॉस्टल अधीक्षक के खिलाफ सड़क पर उतरना बहुत चिंताजनक है। हालांकि अब तो खरगोन में हॉस्टल अधीक्षक के खिलाफ सड़क पर उतरना आम बात हो गई है। चाहे कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के समय की बात करें या फिर कलेक्टर भव्या मित्तल के दोनों के कार्यकाल में ही जिले भर के हॉस्टल्स और सुरक्षित हो गए हैं या कहें भगवान भरोसे हो गए हैं। यहां अंदर की राजनीति इतनी हावी हो गई है कि अब अधिकारियों से भी नहीं संभल रही जबकि अधिकारियों को इस बात की भनक है कि यह सब कौन और क्यों कर रहे हैं या फिर यह भी हो सकता है अधिकारियों के जिम्मेदार अधिकारियों के कई-कई महीने हॉस्टल्स में झांकने तक नहीं जाने के कारण हालात इतने बिगड़ रहे हैं, कि बच्चों को घुन लगे हुए अनाज, सब्जी-रोटी बासी, तेल पानी ठीक से नहीं मिल रहा या फिर वह हॉस्टल अधीक्षक की कमीशनबाजी से परेशान होकर सड़क पर आ गए हैं। यह जांच का विषय है कि आखिर जिलेभर के छात्रावास में भोले भाले छात्र-छात्राएं इतने उग्र क्यों हो रहे हैं कि उन्हें हॉस्टल छोड़कर 70 किलोमीटर दूर तक डीएम से मिलने के लिए दौड़ लगाना पड़ रही है। दुर्भाग्य की बात यह भी है लगातार छात्रावास में हो रही इस तरह की बगावत और राजनीति को लेकर हमारे माननीय जनप्रतिनिधि खामोश क्यों है। 

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