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सफेद सोने का जैविक प्रदेश माफिया? 

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एक समय था जब खरगोन को सफेद सोने की खान कहा जाता था लेकिन अब कुछ जैविक माफियाओं ने जैविक के नाम पर सफेद सोने पर बदनुमा दाग लगा दिया है। किसानों को खबर ही नहीं और उनके नाम के समूह बन गए। वे जैविक कपास उत्पादक हो गए और फर्जी प्रमाण पत्र भी जारी हो गए। भोले-भाले किसानों को भनक भी नहीं वे देश सबसे बड़े जैविक उत्पादक बन गए। अब परत दर परत खुलते जा रही है। आश्चर्य इस बात का है जिला प्रशासन और कृषि विभाग को ये सब नहीं दिख रहा या वे धृतराष्ट्र बन गए हैं।

खरगोन। जिले में साढ़े तीन लाख से अधिक किसान हैं और इनमें 100 किसान भी ऐसे नहीं जो जैविक कपास का उत्पादन कर रहे हो। मंडी सचिव की माने तो खरगोन की सभी मंडियों में जैविक कपास के लिए प्लेटफार्म बना है लेकिन यहां कभी एक क्विंटल भी जैविक कपास लेकर किसान नहीं पहुंचा है। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो जिले में 5 से 10 एकड़ में भी जैविक कपास का उत्पादन नहीं होता है। जैविक कपास माफिया की जादूगरी देखिए जैविक कपास की लाखों गठानें विदेशों में एक्सपोर्ट कर रहे है, ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। 

क्यों प्रदेश अध्यक्ष ही रोड़ पर आए किसान-

जैविक खेती के नाम पर एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है गोरख धंधा खरगोन जिले के सेगांव विकासखंड के किसानों ने जनसुनवाई में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एडीएम रेखा रावत के समक्ष एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। किसानो का आरोप है कि बिना अनुमति उनके नाम, खेत और दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी ICS, जैविक प्रमाणपत्र, और ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट (TC) बनवाए गए और करोड़ों रुपये के जैविक कपास का निर्यात किया गया।

ये है पूरा मामला?

किसानों ने बताया खरगोन के व्यापारी मंजीत सिंह चावला (हरमन कॉटन कोटेक्स) और उनकी टीम ने बिना किसानों की सहमति के निम्न फर्जी आईसीएस समूह तैयार किए। चित्रई कृषक उद्यान समिति। ईको नेक्टर ICS खेड़ापुरा, ईको नेक्टर ICS छोटा डाबरपूरा, रामकोला कृषक उद्यान समिति। इन ICS ग्रुप के नाम पर ब्यूरो वेरिटास, मुंबई से जैविक प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए और APEDA/GOTS सिस्टम के तहत इंटरनेशनल व्यापार किया गया।

पीड़ित किसान बोले-किसान रामदास पिता विक्रम, फूलसिंह पिता रायसिंह, सरदार पिता फूलसिंह, श्यामदास पिता विक्रम ने कहा उन्होंने कभी जैविक खेती नहीं की। किसी समझौते अनुबंध (Agreement) पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनके नाम और खेत की जानकारी का दुरुपयोग किया गया। फर्जी बिल बनाए गए, फर्जी हस्ताक्षर किए गए, और नकली खरीदी-बिक्री दिखाकर ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट जारी किया गया।

किसान बोले रासायनिक खाद का उपयोग करते है-किसानों ने कैमरे पर कहा हमने तो हमेशा रासायनिक खेती की है यूरिया, डीएपी और कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करते हैं। एक किसान ने अपने घर में रखा यूरिया और कीटनाशक का छिड़काव का पंप दिखाते हुए कहा हम जैविक खेती करते ही नहीं। फिर भी हमारे नाम से जैविक प्रमाणपत्र बनवाया गया। यह सरासर धोखा है।

दस्तावेज़ सौंपे गए: किसानों ने जनसुनवाई में जो आवेदन सौंपा, उसमें कई दस्तावेज़ शामिल थे। ईको नेक्टर ICS खेड़ापुरा की फर्जी प्रमाणित किसानो सूची। किसानो के नाम से बना फर्जी एग्रीमेंट, खेतों की जानकारी वाला सर्टिफिकेशन डेटा संबंधित ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट शामिल थे। किसानों ने आवेदन देकर स्पष्ट कहा, मंजीत सिंह चावला और हरमन कॉटन कोटेक्स पर IPC, BNS, IT Act, और जैविक अधिनियम के तहत FIR दर्ज की जाए। APEDA और ब्यूरो वेरिटास से दस्तावेज़ मंगाकर स्वतंत्र जांच हो। दोषियों को सजा देकर किसानों को न्याय मिले।

ये कहा उपसंचालक कृषि ने- एडीएम रावत ने किसानों को कृषि उपसंचालक शिवसिंह राजपूत के पास भेजा, जहां अधिकारी ने बताया पूर्व में भी ऐसी शिकायतें आई हैं। हमने जांच के लिए कमेटी बनाई है और संबंधित को नोटिस जारी किए हैं। रिपोर्ट जल्द कलेक्टर को सौंपी जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी-

महेश पाटीदार किसान नेता महेश पाटीदार का कहना है प्रशासन को 8 दिन की मोहलत दी है। अगर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे। गोटू किसान ने बताया हमने कभी खेती भी नहीं की, ये पूरा फ्रॉड है। हम तो साधारण खेती करते है यूरिया और डीएपी डालते हैं। किसान खुमान का कहना है मेरी जानकरी बगैर मुझे आईसीएस समिति कोषाध्यक्ष बना दिया था। मुझे ना पता था ना मालूम था किसानो के नाम से लूट कर रहे है। हमको बताओ या जानकरी दो इसलिए करवाई के लिए आये है। रामदास किसान रामदास ने बताया हमारे नाम से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है मंजीत सेठ चावला और उसका लड़का आधार कार्ड मांग लेते हैं और जैविक खेती तो हम जानते नहीं साधारण खेती करते है सब खाद रासायनिक डालते है।

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