Thu. Apr 3rd, 2025

एक साथ दो दर्जन से अधिक लोगों ने कर दी सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत?

खरगोन जिले के झिरन्या विकासखंड की ग्राम पंचायत चिरिया में नल-जल योजना से ग्रामीणों को पिछले 40 दिनों से पानी नहीं मिल रहा। परेशान ग्रामीणों ने एक दो नहीं दो दर्जन से अधिक सीएम हेल्पलाइन एक साथ ठोंक दी। एक साथ इतनी से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत होने से नल जल योजना गांव-गांव पहुंचने के दावों की पोल खुल गई। 

खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर झिरन्या तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिरिया में लोग अभी से पानी को मोहताज हैं। ग्रामीणों की माने तो पिछले 40 दिनों से नल-जल योजना के तहत जलप्रपात नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों को मजबूरन निजी बोरिंग से पानी लाना पड़ रहा। ग्राम पंचायत और अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्या हल ना होने पर गुस्साए ग्रामीणों ने शनिवार को एक साथ 25 सीएम हेल्पलाइन पर सिर्फ पानी की समस्या को लेकर शिकायत डाल दी। ग्रामीणों का आरोप है की सरपंच-सचिव ट्यूबवेल से मोटरपम्प भी निकालकर ले गए हैं। करीब डेढ़ माह से ट्यूबवेल पर मोटरपम्प नहीं है। ग्रामीणों का कहना है नल-जल योजना के तहत पिछले डेढ़ माह से ग्राम पंचायत क्षेत्र में जलप्रदाय नहीं किया जा रहा। इससे फरवरी माह में ही ग्रामीणों को गर्मी का एहसास हो गया। ग्राम पंचायत और अन्य अधिकारियों के लापरवाही के कारण हम ग्रामीणों को अभी से निजी ट्यूबवेल के सहारे रहना पड़ रहा है। 

इसलिए करना पड़ी शिकायत-

चिरिया के पत्रकार सेठी हिरवे, शेखर वर्मा, सुयश अग्रवाल, गुमान धारवे, रौनक अग्रवाल, आशीष अग्रवाल का कहना है एक डेढ़ माह से पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्राम पंचायत ईश्वर ध्यान नहीं दे रहा। अर्जुन पवार, विकाश सावले, अनिल गुप्ता का कहना है झिरन्या के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन ग्राम के युवाओं को सीएम हेल्पलाइन पर एक साथ शिकायत करना पड़ी। अभी हमारी समस्या का हल नहीं हुआ तो भोपाल जाकर मुख्यमंत्री महोदय के सामने गुहार लगाएंगे। 

आठ दिन से मोटरपंप सुधरने भेजा है-

ग्राम पंचायत चिरिया सचिव संतोष चौहान का कहना है 8 दिन से जलप्रदाय नहीं किया जा रहा। मोटरपंप सुधारने के लिए भेजा है। कितने लोगों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की है इस बात कि मुझे जानकारी नहीं है। गांव में चार हेडपंप है इनमें से दो में जलस्तर है और दो जल स्तर कम होने से बंद हो गए हैं। पीएचई के अधिकारी कभी-कभी देखने के लिए आते हैं। 

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